अभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) शिक्षक दिवस विशेष ( कविता ) मेरी बात, (रचना - 16, शिक्षक) धन - दौलत की लालसा नहीं है मुझे, ज्ञान है मेरी पूंजी और चरित्र है मेरा बल, कुंभकार हूं मै मानवीय संसाधन का, गढ़ता हूं नित नए…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात, (रचना - 15,क्योंकि सी लिए हैं,होंठ मैंने....) बढ़ती उम्र के साथ, गुजर रहा है वक्त धीरे - धीरे, मुट्ठी से फिसलती हुई रेत की मानिंद, नहीं रखता हूं वास्ता अब मैं ख्वाहिशें से,…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेेरी बात ( रचना- 14,भूूूख ) "भूख न जाने जूठा भात, नींद न जाने टूटी खाट, प्यास न जाने धोबीघाट, प्यार न जाने जात कुजात" , यह पंक्तियां जिसने भी कहीं बिल्कुल ही सत्य कहा है।…
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