अभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना - 52,मैं सिवान हूं ) मैं सिवान हूं.... भारतवर्ष के इतिहास की अनेकों गाथाएं मेरी ही जमीं पर पल्लवित और पुष्पित हुई है। परंतु, मेरी ये गाथाएं अब तो इतिहास के पन्नो में ग…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) (मेरी बात,रचना - 48, नालायक) ' नालायक', एक ऐसा शब्द है, जो हिंदी के 'लायक' शब्द का विलोम है। 'लायक' शब्द में 'ना' उपसर्ग लगाने से नालायक शब्द का निर्म…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) (मेरी बात, रचना - 46, होली : एक विश्लेषण) होली शब्द से मन में दो तस्वीरें उभरती है - एक रंगों से सराबोर लोग लाल,गुलाबी,हरे, नीले,पीले रंगों से पुते कपड़ों और चेहरों के साथ और दूसरी …
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) (मेरी बात, रचना - 43, तार) परिचय टेलिग्राफ यूनानी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है - दूर से लिखना। विद्युत द्वारा संदेश भेजने की इस पद्धति को तार प्रणाली तथा इस प्रकार समाचार भेजन…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात, (रचना - 41, निर्वासन ) निर्वासन शब्द से हम सभी कभी न कभी दो - चार होते ही हैं। जीवन निर्वासन की अनंत गाथा है। नौ माह के बाद मां की कोख से निर्वासन की पीड़ा झेलने के बाद ही …
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना - 33, झाड़ू ) मै झाड़ू हूं। मै मनुष्य द्वारा , मनुष्य के लिए, मनुष्य की रचना हूं। आप मुझे उपकरण, यंत्र, शस्त्र आदि की संज्ञा दे सकते हैं। सभ्यता के प्रारम्भ के साथ ही …
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात ,(रचना - 28, प्रेम ) प्रेम क्या है, यह चिंतन का बिंदु जगत के आरंभ से रहा है। कुछ मानते है कि प्रेम एक एहसास है तो कुछ के अनुसार प्रेम भावनाओं का प्रवाह मात्र है। कुछ मानते ह…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात ,(रचना - 25, सुन्दरता ) सुंदरता, खूबसूरती, सौंदर्य,रूप या फिर सौंदर्य बोध । किसको नहीं आकर्षित करती?किसको मोहित नहीं करती? कौन किसी तीखी नक्श- नैन वाली अप्रतिम सुंदरी को देख…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात, रचना -22, ( ताला - आलेख ) मैं ताला हूं। एक उपकरण जो कुंजी/गुप्त अंकन से खुलता और बंद होता है। मानव ने जीवन में वस्तुओं की सुरक्षा हेतु सदैव मेरा उपयोग किया है। मैंने भी उसक…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) हिन्दी दिवस विशेष मेरी बात, (रचना - 18 , हिन्दी दिवस) भारतीय संस्कृति सदैव सबको खुद में समाहित कर उसे अपना बना देती है। कालांतर में हमने अनेक उतार - चढाव देखे है।अनेक शासक जो अन्य दे…
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