अभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना - 54, तुम और मैं.. ) तुम और मैं, हैं सबकी सोच से परे, तुम शब्द तो मैं अर्थ, तुम बिन मैं हूं व्यर्थ, तुम ध्वनि तो मैं नाद, तुम जीवन तो मैं प्रेरणा, तुम सांसे तो मैं प्र…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना - 53,शब्द ) शब्दों में ही रचा - बसा संसार, शब्द ही सबक, शब्द ही परिणाम, शब्द ही सनक, शब्द ही ललक, शब्द ही कविता, शब्द ही माया, शब्द ही सहानुभूति, शब्द ही मरहम, शब्द ही…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना - 52,मैं सिवान हूं ) मैं सिवान हूं.... भारतवर्ष के इतिहास की अनेकों गाथाएं मेरी ही जमीं पर पल्लवित और पुष्पित हुई है। परंतु, मेरी ये गाथाएं अब तो इतिहास के पन्नो में ग…
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