अभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात ,(रचना - 23, मिट्टी के खिलौने ) लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया था। ऐसे में पत्नी और बच्चों के साथ शहर से गांव आना पड़ा था,और वर्षों बाद मां और पिताजी हमें गांव आया देख कर का…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना -23,धरा मांग रही है विध्वंस) हे काल, हो कर कराल, भरो हुंकार एक बार और, करके अपना तांडव, कर दो अब विप्लव, धरा मांग रही है विध्वंस, अब न तो राम के वाण है, और न ही परशुर…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात, रचना -22, ( ताला - आलेख ) मैं ताला हूं। एक उपकरण जो कुंजी/गुप्त अंकन से खुलता और बंद होता है। मानव ने जीवन में वस्तुओं की सुरक्षा हेतु सदैव मेरा उपयोग किया है। मैंने भी उसक…
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