अभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात, (रचना - 35, मुखौटा) हर चेहरा आज सुंदरता का पर्याय है, इन चेहरों के पीछे साजिशों और रंजिशो के, कई चेहरों का मुखौटा है, जो करते थे दावा अपनेपन का , आज वही सबसे ज्यादा दू…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना - 34,कि तुम न आओगी) न तुम जानती हो और न मै, कि बात क्या हुई, तल्खियां पसरती गई और हम खुद में ही सिमटते गए, फिर नहीं आया रास हमें कुछ भी, तुम्हारा काजल, बिंदिया और श्…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना - 33, झाड़ू ) मै झाड़ू हूं। मै मनुष्य द्वारा , मनुष्य के लिए, मनुष्य की रचना हूं। आप मुझे उपकरण, यंत्र, शस्त्र आदि की संज्ञा दे सकते हैं। सभ्यता के प्रारम्भ के साथ ही …
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