अभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात (रचना - 8, चाहता हूं कि मैं भी कुछ कहूं... ) चाहता हूं कि मैं भी कुछ कहूं, बहुत कुछ सुनाना हैं,तुम्हे बहुत कुछ सुनना भी मुझे, तुम्हारी शिकायतें और तानें, अब मुझे बुरे नहीं …
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात (रचना - 7, आखिर क्यों ?) [1] संघर्ष और विवाद के पीछे, सुलह की पहल आखिर क्यों? ज़िद और घमंड़ के पीछे, स्वार्थ की आंधी आखिर क्यों? [2] प्रश्नों और उत्तरों के पीछे, अनिश्चितता …
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात (रचना - 6, मैं औेर मेरा अकेलापन) मैं औेर मेरा अकेलापन है चिर - अनंत साथी, जन्म से ही हूं अकेला अपने हर सुख - दुःख में हमेशा शून्य में निहारते हुए खुद को, सोचता हूं अपने अके…
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