अभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात ,(रचना - 28, प्रेम ) प्रेम क्या है, यह चिंतन का बिंदु जगत के आरंभ से रहा है। कुछ मानते है कि प्रेम एक एहसास है तो कुछ के अनुसार प्रेम भावनाओं का प्रवाह मात्र है। कुछ मानते ह…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,[रचना-27, रुपए मायने नहीं रखते (Rupees doesn't matter)] हमारे आस - पास ऐसे लोगों की एक बड़ा समूह विद्यमान है, जो एक दार्शनिक की भांति अपने प्रत्येक वक्तव्य में "रुप…
Read moreअभिव्यक्ति : कुछ अनकही सी (abhivyaktibyrcgaur) मेरी बात,(रचना-26, प्रश्न ही अब मेरे उत्तर हैं.......) रिश्तों की दहलीज पर , कुछ अनसुलझे प्रश्नों के साथ, बढ़ा रहा हूं कदम अपने, अनजानी डगर पर, प्रश्न ही अब मेरे उत्तर हैं...... नहीं…
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